छलावा
------------- कानों में आकर किसने
ये गीत गुनगुना दिया ?
सोए हुए थे अरमान ,
चुपके से जगा दिया |
दिल को रखा था
छलावे में,
कि पूरी तरह से
भूल चुकी हूँ तुम्हे |
याद तुम्हारी
आ न जाए कहीं से ,
बंद करके रखे थे
दरवाजे सारे|
देखो इस दिल ने
मुझे कैसे दग़ा दिया |
सोए हुए थे ..........|
डर लगता है अब
अपनी ही परछाई से,
गुजरती हूँ चाहे
जिस भी गली से |
क्यों लगने लगा है
मुझे ऐसे ,
कि पुकार लोगे
तुम यहीं कहीं से |
मेरे सूनेपन ने आज
यादों का सिलसिला दिया
सोए हुए थे ...........|
कानों में आकर किसने
ये गीत गुनगुना दिया
सोए हुए थे .............|
bahut badhiya. keep posting. magazine me jo chhapa hai, usko bhi post karo.
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